राम राम ....
"सुनीता की खेती म s तमारो स्वागत छे"
आज वात करागा होळी की तैयारी न की
अव काई वात न याद करु बालपण म s हम अस्सा गोबर का वैयडया बणावता था की पुच्चो जs मत ....पूरी 108 वैयडीया रय न s साथ म ये बड़ो नारयण भी न पान ,सुपारी ,लोंग..कुत्ता की जिबान अलग सी बणावता था हउ न महरी संगात म्हारी मोटा माय .....
चाड्या का चाड्या चर-चराट घाम मsसुखाड़ा .. चणा,गऊ की उम्बी न कि साथ s.....
याज तो तासीर छे आपणीँ न आपणा गॉव की।
आभी खेत खला न लिपि छाबि न न तैयार करी लेओ कोठी -कागड़ भी मजेका धोई -चोई ले ओ .....पुराणा थैला होय तो उन ख s भी कीटनाशक सी उपचारित करी न धरी लेवा तो भली वात होयग ...
तो अव तम बठो
हउँ तो चली होळी का वडडया बणावण..
राम राम ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें